मैं खुश हूँ:कविता
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मैं खुश हूँ
जब नींद अभी अधूरी थी,
मैं जाग गई, घर जागा नहीं,
सपनों की चाय फिर ठंडी पड़ी।
चूल्हा पहले जला, फिर उम्मीदें,
पर मैं नहीं जली, मैं खुश हूँ।
बचपन में गुड्डे-गुड़ियों के खेल,
पर दुनिया ने सिखाया सब्र का मेल।
"लड़कियाँ धीरे बोलती हैं",
"अच्छे घर की बेटियाँ कम हँसती हैं।"
पर मैंने हँसी नहीं रोकी,
अब भी गूँजती हूँ, मैं खुश हूँ।
कभी किताबों में डूबी, कभी रसोई में खोई,
कभी सपनों के पंख लगे, कभी परवाह में रोई।
पढ़ने निकली थी आकाश छूने,
पर सीली आँखों से विदाई हुई,
बाबुल का घर छूटा, पर खुद को नहीं छोड़ा,
अब भी चल रही हूँ, मैं खुश हूँ।
ब्याह के बाद घर मिला, पर कमरा नहीं,
रिश्ते मिले, पर जगह नहीं।
कभी ‘बहू’, कभी ‘माँ’, कभी ‘पत्नी’ बन गई,
पर मैं? मैं कहाँ रह गई?
खुद की तलाश में उलझी,
अब भी ढूंढ रही हूँ, मैं खुश हूँ।
तन की साड़ी में लिपटे मन के सवाल,
क्या मैं बस ये ही हूँ?
रात के खाने से सुबह की धूप तक,
सपनों से हकीकत के टूट तक,
सबका ख्याल रखा, पर खुद को ही भूली,
फिर भी हँस रही हूँ, मैं खुश हूँ।
रोज़ की भाग-दौड़, रोज़ का संघर्ष,
रिश्तों की उलझन, मन का अधूरा हर्ष।
कभी बॉस की डांट, कभी समाज की घुड़की,
फिर भी जिम्मेदारियों में मैंने खुद को निपुण किया,
थोड़ी थकी हूँ, पर ठहरी नहीं,
अब भी दौड़ रही हूँ, मैं खुश हूँ।
हर महीने दर्द सहा, फिर भी काम पर गई,
हर रिश्ते में दिल दिया, फिर भी कम आंकी गई।
पढ़ाई की, कमाई की, फिर भी ‘तुम्हारी सैलरी कम है’ सुनी,
गृहस्थी संभाली, घर संवारा, फिर भी ‘तुम बस घर पर ही तो हो’ सुना,
पर मैंने हार मानी नहीं,
अब भी लड़ रही हूँ, मैं खुश हूँ।
उम्र बढ़ी, तो सवाल भी बढ़े,
"अब तक शादी नहीं?"
"बच्चे कब होंगे?"
"अब तुम जवान नहीं रही!"
पर मैंने चेहरे की झुर्रियों में हँसी बचा ली,
अब भी मुस्कुरा रही हूँ, मैं खुश हूँ।
मैं एक औरत हूँ,
जो मिट्टी से भी फौलाद बन सकती है,
जो आँधियों में भी दिया जला सकती है,
जो टूटकर भी समेट सकती है,
जो खुद से ही खुद को पूरा कर सकती है।
हाँ, रास्ते मुश्किल हैं, दुनिया बेरहम है,
पर मैं? मैं कमजोर नहीं हूँ।
अब भी चमक रही हूँ, मैं खुश हूँ।
अर्थ और भाव
यह कविता हर उस महिला की कहानी कहती है, जो तमाम संघर्षों के बावजूद मुस्कुराती है, अपने लिए खड़ी होती है, और दुनिया के बनाए नियमों को चुनौती देती है। इसमें घर, समाज, रिश्ते, करियर, उम्र और पितृसत्ता की बंदिशों को दर्शाया गया है, लेकिन अंत में यह बताती है कि महिलाओं में हौसला, हिम्मत और खुद को संवारने की ताकत कभी खत्म नहीं होती।
😊💖
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amazing...
ReplyDeleteThank you 🙏
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