हिम्मत कर ले आज तू, तो जंग जीत जाएगी
हिम्मत कर ले आज तू, तो जंग जीत जाएगी अपनी ख़ुशियों की ख़ातिर, किसको दोष ठहराएगी? हिम्मत कर ले आज तू, तो जंग जीत जाएगी, हर आँधी से टकरा के, खुद को सींच पाएगी। अभी तो बस शुरुआत है, मंज़िल बहुत दूर नहीं, तेरे क़दमों की आवाज़ से, अब खामोशी भी चीर जाएगी। अपनी ख़ुशियों की ख़ातिर, किसको दोष ठहराएगी? कभी हालात, कभी रिश्ता, क्या खुद को ना आजमाएगी? जो टूटा था, वो सपना फिर से जोड़े हाथों से, आशाएँ खुद लिख डालेगी, ना तक़दीर से डर पाएगी। तेरे आंसू भी तेरी ताक़त हैं, याद रख ये बात, हर दर्द से तू निकलेगी, बनकर खुद की सौगात। ज़िम्मेदारियाँ हैं बहुत, पर ज़रा खुद को भी समझ, तू भी कोई रिश्ता है, बस औरों का नाम नहीं। जो बीत गया, वो वक्त था, अब तू वक्त बन जाएगी, हिम्मत कर ले आज तू, तो जंग जीत जाएगी। अपनी ख़ुशियों की ख़ातिर, बहानों में क्या रखा है? अब खुद को थाम ले तू, ये सफ़र तेरा ही लिखा है। हिम्मत कर ले आज तू, तो जंग जीत जाएगी अपनी ख़ुशियों की ख़ातिर, किसको दोष ठहराएगी?