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नारी — एक नई सुबह

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 शीर्षक: नारी — एक नई सुबह नारी केवल एक शब्द नहीं, वह जीवन की एक धारा है। शांत भी, गहरी भी, और अनंत तक बहने वाली भी। उसकी आँखों में सपनों का आकाश है, और मन में अडिग विश्वास है। वह जहाँ खड़ी हो जाती है, वहीं से एक नया इतिहास है। वह चुप भी रहती है तो समय को बहुत कुछ सिखा जाती है, और जब मुस्कुरा देती है तो थकी हुई दुनिया में आशा जगा जाती है। वह संघर्ष भी है, और सृजन भी। वह कोमल भी है, और अटूट साहस का दर्पण भी। कभी वह धूप बनकर अंधेरों को रास्ता दिखाती है, कभी चाँदनी बनकर थके दिलों को सुकून दिलाती है। उसके कदम जहाँ पड़ते हैं, वहाँ विश्वास जन्म लेता है। उसकी एक छोटी सी मुस्कान से जीवन फिर से खिल उठता है। उसके भीतर एक उजाला है जो कभी बुझता नहीं, वह जहाँ जाती है वहाँ जीवन ठहरता नहीं। आज का दिन केवल एक दिन नहीं, यह उसकी गरिमा का सम्मान है। हर स्त्री के मन की गहराई में एक अद्भुत, अनंत आसमान है। यह कविता समर्पित है हर उस स्त्री को जो अपनी शांति, अपने साहस और अपनी मुस्कान से दुनिया को थोड़ा और सुंदर बना देती है। Happy Women’s Day – Her Voice के साथ हर नारी को सलाम।

​"ममत्व की ढाल"

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 दुनिया देखती है बस चेहरा तुम्हारा, वो धीरज, वो साहस, वो मुस्कान प्यारी। सबके सवालों का बस एक ही उत्तर, तुम घर की छत भी, तुम ही हो सवारी। थक कर जो टूटे, वो हिम्मत नहीं तुम, जो आँसू बहा दे, वो फुर्सत नहीं तुम। नन्हे से चेहरों की खातिर सँभलना, तुम्हारी ज़रूरत, शिकायत नहीं तुम। मौन का बोझ सीने में अपने एक कोना रखा है, जहाँ यादों का भारी बिछौना रखा है। वो आँसू जो पलकों तक आकर हैं लौटे, उन्हें कल की खातिर पिरोना रखा है। तुम चाहती हो कि बस चीख मारो, थक कर इस दुनिया से खुद को पुकारो। पर जूतों के फीते अभी बाँधने हैं, तुम कैसे ये हिम्मत अभी हार जाओ? कोमलता में छिपी शक्ति मुस्कुराकर पहाड़ों को ढोना भी तुम हो, अंधेरी रातों में एक कोना भी तुम हो। सब कहते हैं तुम फौलाद जैसी बनी हो, पर खुदा जानता है कि 'माँ' ही तो तुम हो। अकेली नहीं हो, तुम खुद में फौज हो, हर मुश्किल का अपनी, तुम ही तो मौज हो। गर आँखें भर आएँ, तो डरना नहीं तुम, तुम अपनी कहानी की असली ओज हो। ​जब थक कर ये दुनिया सो जाती है, तुम्हारी थकान और गहरी हो जाती है। कोई हाथ नहीं जो कंधे को थामे, कोई लफ्ज़ नहीं जो तुम्हें "बस" कह...