नयी राह मिली है अब, उस पर चलने वाली हूँ
नई राह मिली है अब नयी राह मिली है अब, उस पर चलने वाली हूँ, जो अब तक ना जाना था, वो सब अब जानने वाली हूँ। छोटे-छोटे ख़्वाबों को अब बड़ा बनाने वाली हूँ, ख़ुद के लिए, पहली बार, जीने वाली हूँ। अब तक जो बंधनों में बँधी रही चुपचाप, आज उस चुप्पी से बाहर निकल रही हूँ बेहिसाब। जिन सवालों से डरती थी, अब पूछने वाली हूँ, हर जवाब को अपना सच समझने वाली हूँ। ज़िन्दगी की उस किताब में जो पन्ना खाली था, अब उसमें अपने नाम की कहानी लिखने वाली हूँ। जो भी अधूरा था, अब उसे पूरा करने वाली हूँ, जो खुद से दूरी थी, वो अब पास लाने वाली हूँ। अब कोई और मंज़िल नहीं बताएगा मुझे, मैं अपने नक़्शे खुद बनाने वाली हूँ। भीड़ में खोई थी जो आवाज़ मेरी, अब उसी आवाज़ को पहचान दिलाने वाली हूँ। ये राह नयी है, पर मैं डरी नहीं हूँ, हर कांटे पर अब मुस्कुरा के चलने वाली हूँ। जो अब तक छूट गया था, वो सब अब खुद से जोड़ने वाली हूँ। नयी राह मिली है अब, उस पर चलने वाली हूँ, जो अब तक ना जिया था, उस जीवन को जीने वाली हूँ। "Her Voice" कविता उस हर स्त्री के लिए है जो अब पहली बार खुद के लिए जी रही है।...